भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय, जयंती 2023 | Bhimrao Ambedkar Biography In Hindi, Jayanti 2023

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भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय, भीमराव अंबेडकर जयंती 2023, बाबा साहेब बायोग्राफी (Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi, Baba Saheb Jayanti, Ambedkar Jayanti 2023)

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जिन्हें बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है वह उन महान लोगों में से एक हैं जिन्होंने भारत के संविधान निर्माण में सहयोग देकर भारत को विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके साथ ही बाबासाहेब भारतीय इतिहास के एक जाने-माने राजनेता व प्रख्यात विधिवेत्ता थे और उन्होंने देश में छुआछूत, जातिवाद जैसी कुरीतियों को मिटाने के लिए बहुत से आंदोलन चलाए हैं।

उनके महान कार्यों से देश को विकास के लिए बहुत कुछ प्रदान करने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को मरणोपरांत वर्ष 1990 में देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।

तो दोस्तों आज के अपने लेख डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबासाहेब) का जीवन परिचय (Dr. Bhimrao Ambedkar Biography In Hindi) के जरिए हम आपको उनके जीवन की एक झलक दिखाने का प्रयास करेंगे तो आइए जानते हैं उनके बारे में-

भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय, जयंती 2023 | Bhimrao Ambedkar Biography In Hindi, Jayanti 2023

Table of Contents

डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबासाहेब) का जीवन परिचय-

नाम (Full Name)भीमराव रामजी अबेडकर
उपनाम (Nick Name)बाबासाहेब, बोधिसत्व, भीम, भिवा
जन्म (Date of Birth)14 अप्रैल 1891
जन्म स्थान (Birth Place)मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में सैनिक छावनी, महू
राशि (Zodiac Sign)मेष
धर्म (Religion)हिंदू
जाति (Caste)अनुसूचित जाति (महार)
नागरिकता (Nationality)भारतीय
शैक्षणिक योग्यता (Education Qualification)मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक एवं समाज शास्त्र राजनीतिक शास्त्र अर्थशास्त्र और मानव विज्ञान में परास्नातक
कोलंबिया विश्वविद्यालय ,न्यूयॉर्क से पीएचडी
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से एमएससी
ग्रेसिन्न लंदन से बैरिस्टर
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से डीएससी
कोलंबिया विश्वविद्यालय न्यू यार कसे एलएलडी
उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद, से डि.लिट.
पेशा (Profession)भारतीय राजनीतिज्ञ एवं विधि वेत्ता
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)विवाहित
शौक (Hobbies)पुस्तकें पढ़ना, संगीत सुनना और यात्राएं करना
पसंदीदा व्यक्ति (Favorite Person)गौतम बुद्ध ,हरिश्चंद्र, कबीरदास
मृत्यु (Date of Death)6 दिसंबर 1956
मृत्यु का स्थान (Death Place)दिल्ली ,भारत
मृत्यु का कारण (Death Reason)मधुमेह की लंबी बीमारी
समाधि स्थल (burial ground)चैत्यभूमि, मुंबई

भीमराव अंबेडकर (बाबासाहेब) कौन है?

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से लोकप्रिय भीमराव रामजी आंबेडकर एक लोकप्रिय भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, समाज सुधारक और बहुज्ञ थे।

अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने व जरूरतमंदों की सहायता एवं उनके अधिकारों का समर्थन करने वाले बाबासाहेब स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्यायमंत्री वा भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे।

भीमराव अंबेडकर का जन्म एवं शुरुआती जीवन-

आधुनिक भारत के मसीहा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश में स्थित मऊ सैनिक छावनी में हुआ था।

उनके पिता का नाम मालोजी सकपाल था जो कि ब्रिटिश सेना में मेजर सूबेदार के पद पर कार्यरत थे वहीं उनकी माता जी का नाम भीमाबाई था जो कि एक धार्मिक व गौशाला ग्रहणी महिला थी।

भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था और उनके पिता के सेना मैं होने के कारण उनके जीवन में अनुशासन अनिवार्य तत्व के रूप में समाहित हो गया था।

वह अपने माता-पिता की 14वीं संतति थे एवं एक अछूत समझे जानेवाले समुदाय से संबंधित होने के कारण उन्हें अपने बचपन में जातिवाद की कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा।

और उनके जीवन में जातिगत भेदभाव ने इस प्रकार गहरा प्रभाव डाला कि उन्होंने जीवन पर्यंत इस भेदभाव के खिलाफ लड़ने का संकल्प ले लिया।

उनके बचपन में ही उनकी माता जी का देहांत हो गया था जिसके बाद उनके पिता ने दूसरा विवाह किया और वह परिवार के साथ मुंबई आ गए।

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भीमराव अंबेडकर की शिक्षा (Dr. Bhimrao Ambedkar Education)

जब वह मुंबई शहर में आए तो वह एक ऐसे मकान में रहने गए जहां एक ही कमरे में पहले से बेहद गरीब लोग रहते थे और वहां पर उन दोनों के एक साथ सोने की व्यवस्था नहीं थी तब बाबासाहेब और उनके पिता बारी-बारी से सोया करते थे।

और जब उनके पिता सो रहे होते थे तब भीमराव अंबेडकर दीपक की हल्की सी रोशनी में अपनी पढ़ाई किया करते थे और वह संस्कृत पढ़ने के बहुत इच्छुक थे परंतु वह निम्न जाति के थे इस कारण उन्हें संस्कृत पढ़ने का अधिकार नहीं था।

उन्होंने अपने जीवन में अपमानजनक स्थितियों का सामना करते हुए धैर्य एवं वीरता के साथ अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए चल दिए।

डॉ भीमराव अंबेडकर ने 1907 में मैट्रिकुलेशन पास करने के बाद एलिफेंटम कॉलेज से वर्ष 1912 में ग्रेजुएट हुए। इसके बाद उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और यहां से वर्ष 1915 में अर्थशास्त्र विषय से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने 1917 में पीएचडी की उपाधि हासिल की लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया लेकिन साधन के आभाव के कारण व अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए परंतु कुछ समय बाद वह पुनः लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स गए और अपनी शिक्षा को पूरा किया।

इसके साथ साथ ही उन्होंने एमएससी और बैरिस्टर एवं लॉ की डिग्री भी प्राप्त की थी। इस प्रकार बाबासाहेब अपने युग के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे राजनेता एवं विचारक थे।

उन्हें शिक्षा से बहुत ज्यादा प्यार था और उन्होंने अपने जीवन में लगभग 64 विषयों मैं मास्टर बने तथा 9 भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया उन्होंने विश्व के सभी धर्मों के रूप में पढ़ाई की थी

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इमेज सोर्स – गूगल

भीमराव अंबेडकर का परिवार (Dr. Bhimrao Ambedkar Family)

पिता का नाम (Father’s Name)रामजी सकपाल
माता का नाम (Mother’s Name)भीमाबाई सकपाल
बहन का नाम (Sister’s Name)मंजुला, तुलसी, गंगाबाई, रामबाई
भाई का नाम (Brother’s Name)बाला राव और आनंद राव
दादा का नाम (Grand Father’s Name)मालोजी सकपाल
पहली पत्नी (First Wife’s Name)रमाबाई आंबेडकर (1906- 1935)
दूसरी पत्नी (Second Wife’s Name)डॉक्टर सविता अंबेडकर (1948)
बेटी का नाम (Daughter Name)कोई नहीं
बेटे का नाम (Son’s Name)यशवंत राव अंबेडकर (मीराबाई के बेटे)

भीमराव अंबेडकर का विवाह, पहली पत्नी (Bhimrao Ambedkar First Wife)

बाबासाहेब जब आप कक्षा 5वी की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तब उनका विवाह 9 वर्ष की रमाबाई से हुआ था। रमाबाई और बाबा साहेब की पांच संताने थी जिनमें से चार पुत्र यशवंत, रमेश, गंगाधर, राजरत्न और एक पुत्री थी जिनका नाम इंदु थी।

परंतु उनके पुत्र यशवंत को छोड़कर उनकी अन्य सभी संतानों की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी, इसके बाद लंबी बीमारी के कारण वर्ष 1935 उनकी पत्नी रमाबाई का भी निधन हो गया।

भीमराव अंबेडकर की दूसरी शादी, दूसरी पत्नी (Dr. Bhimrao Ambedkar Second Wife)

इसके बाद 1940 के दशक के अंत में भारतीय संविधान के मसौदे को पूरा करने के बाद वह नींद ना आने की बीमारी से पीड़ित थे और उनके पैरों में न्यूरोथेरेपी दर्द था तब वह अपने उपचार के लिए मुंबई गए और वहां उनकी मुलाकात शारदा कबीर से हुई।

डॉक्टरों ने उन्हें एक ऐसे जीवनसाथी की सलाह दी जो कि अच्छा खाना पकाने वाली हूं और उनकी देखभाल करने के लिए उनके पास चिकित्सा का ज्ञान भी हो।

इसके बाद बाबासाहेब ने 15 अप्रैल 1948 को नई दिल्ली में अपने घर में डॉक्टर शारदा कबीर के साथ विवाह कर लिया और विवाह के बाद डॉक्टर शारदा कबीर ने सविता अंबेडकर नाम अपनाया और उनके बाकी के जीवन में उनकी देखभाल की।

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का राजनीतिक जीवन

जातिवाद के विरुद्ध प्रमुख संघर्ष करता एवं दलित उत्थान के अगुआ के रूप में प्रसिद्ध बाबासाहेब को भारत की राजनीति में प्रमुख स्थान प्राप्त है उन्होंने वर्ष 1926 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।

इसके साथ ही वह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न ने महत्वपूर्ण आंदोलनों में शामिल रहे थे उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के दौरान समाज के वंचित एवं दलित वर्गों के उत्थान के लिए सक्रिय रूप से भूमिका निभाई है।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के दौरान समाज के पिछड़े एवं वंचित वर्गों के नागरिकों के हक की आवाज के लिए विभिन्न आंदोलन चलाए एवं विभिन्न संगठनों का नेतृत्व किया।

वर्ष 1932 में भारतीय समाज में छुआछूत एवं पिछड़े वर्ग के दलित समुदायों को भारतीय राजनीति की मुख्यधारा में स्थान देने हेतु गांधीजी एवं डॉ भीमराव अंबेडकर के मध्य पूना पैक्ट साइन हुआ था।

इसके अलावा डॉ आंबेडकर तीनों गोलमेज सम्मेलनों में दलितों के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए थे।

1936 में बाबा साहेब ने स्वतंत्र मजदूर पार्टी का गठन किया था और 1937 के केंद्रीय विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 15 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी को ऑल इंडिया शेड्यूल कास्ट पार्टी में बदल लिया और इस पार्टी के साथ वे 1946 के संविधान सभा के चुनाव में खड़े हुए परंतु उनकी पार्टी ने इस चुनाव में बहुत ही खराब प्रदर्शन दिखाया।

अंबेडकर जी को रक्षा सलाहकार कमेटी में सदस्य बनाया गया था वह वयसराय एग्जीक्यूटिव परिषद में उन्हें लेबर का मंत्री बनाया गया था, इसके साथ ही उन्हें आजाद भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

संविधान निर्माण में बाबा साहेब का योगदान

ब्रिटिश सत्ता को देश से उखाड़ फेंकने की कवायद तो वर्षों से चल रही थी और पहले स्वशासन फिर स्वाराज्य प्राप्ति की अवधारणा के बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया।

परंतु देश की व्यवस्था अभी भी ब्रिटिश राजतंत्र आत्मक थी और इसे तोड़ने एवं देश में लोकतंत्र की स्थापना करने के लिए आवश्यकता थी देश के अपने संविधान की।

और जब संविधान के प्रारूप को तैयार करने की बात आई तब एक अत्यंत योग व्यक्ति का नाम सामने आता है और वह थे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जिन्हें संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

बाबासाहेब जिन्हें भारतीय संविधान के जनक के रूप में जाना जाता है उन्होंने संविधान के निर्माण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इसके साथ ही, उन्होंने संविधान की धारा 370 का विरोध भी किया था परंतु इनकी इच्छा के विरुद्ध भी इस धारा को संविधान में सम्मिलित किया गया।

संविधान का निर्माण करने के कारण उन्हें आधुनिक मनु के नाम से भी जाना जाता है भारतीय संविधान के निर्माण में उन्होंने अल्पसंख्यक वर्गों को समानता का अधिकार प्रदान करने के अतिरिक्त विभिन्न समुदायों के सामाजिक हकों को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रावधान सुनिश्चित किए।

अपने काम को पूरा करने के बाद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने कहा-

"मैं महसूस करता हूं कि संविधान, साध्य (काम करने लायक) है, यह लचीला है पर साथ ही यह इतना मजबूत भी है कि देश को शांति और युद्ध दोनों के समय जोड़ कर रख सके। वास्तव में, मैं कह सकता हूं कि अगर कभी कुछ गलत हुआ तो इसका कारण यह नहीं होगा कि हमारा संविधान खराब था बल्कि इसका उपयोग करने वाला मनुष्य अधम था।" 
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का छुआछूत के विरुद्ध संघर्ष, आंदोलन

दोस्तों बाबासाहेब छुआछूत की पीड़ा को जन्म से ही झेलते आ रहे थे जाति प्रथा और ऊंच-नीच का भेदभाव वह बचपन से ही देखते आए थे और इसके फलस्वरूप उन्होंने अपने जीवन में काफी अपमान का सामना किया है।

इतना सब कुछ झेलने के बाद डॉक्टर अंबेडकर चाहते थे कि निम्न जाति वालों को भी समाज में बराबर का दर्जा दिया जाए और उनके खिलाफ छुआछूत की प्रथा का अंत हो इसी कारण उन्होंने छुआछूत के विरोध किया।

इसीलिए उन्होंने 1920 के दशक में अपने भाषण में यह साफ साफ कहा था कि- “जहां मेरे व्यक्तिगत हित और देश हित में टकराव होगा वहां पर मैं देश के हित को प्राथमिकता दूंगा, परंतु जहां दलित जातियों के हित और देश के हित में टकराव होगा वहां मैं दलित जातियों को प्राथमिकता दूंगा.”

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जीवन पर आधारित फिल्में और धारावाहिक

  • भीम गर्जना
  • बालक अंबेडकर
  • युग पुरुष डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर
  • डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर
  • तीसरी आजादी
  • राइजिंग लाइट
  • शूद्रा द राइजिंग
  • रमाबाई
  • पेरियार
  • ए जर्नी आफ सम्यक बुद्ध

भीमराव अंबेडकर का धर्म परिवर्तन

एक बार 1950 में अंबेडकर जी एक सम्मेलन मैं सम्मिलित होने के लिए श्रीलंका गए वहां जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म को देखा तो वे उसे अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन करने के बारे में सोचा तथा उन्होंने धर्म परिवर्तन करके खुद बौद्ध धर्म को अपना लिया।

उन्होंने बौद्ध धर्म के बारे में लिखा एवं अपने भाषण में उन्होंने हिंदू अनुष्ठान, संबंध व जाति विभाजन की घोर निंदा की उन्होंने 1955 में भारतीय बौद्ध महासभा का गठन किया।

उन्होंने 2 दिसंबर 1956 को काठमांडू में हुए चौथे विश्व बुद्धि सम्मेलन में हिस्सा लिया था और वहीं पर अपनी पुस्तक द बुद्धा और काल मा की हस्तलिपि को पूरा किया।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित पुस्तकें (Dr. Bhimrao Ambedkar Books)

  • फेडरेशन वर्सेस फ्रीडम (1936)
  • पाकिस्तान और द पार्टीशन ऑफ इंडिया/थॉट्स ऑन पाकिस्तान (1940)
  • रानाडे, गांधी एंड जिन्नाह (1943)
  • स्टेट्स एंड माइनोरिटीज (1947)
  • द कैबिनेट मिशन एंड द अनटचेबल्स (1946)
  • वेटिंग फॉर अ वीजा (आत्मकथा) (1935-1936)
  • द बुद्धा एंड हिज धम्मा (1957)
  • व्हाट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द अनटचेबल्स (1946)
  • शूद्र कौन और कैसे
  • महाराष्ट्र भाषाई प्रांत
  • बहिष्कृत भारत
  • जनता
  • जाती विच्छेद
  • भारत का राष्ट्रीय अंश
  • भारत में जातियां और उनका मशीनीकरण
  • भारत में लघु कृषि और उनके उपचार
  • मूलनायक
  • ब्रिटिश भारत में साम्राज्यवादी वित्त का विकेंद्रीकरण
  • रुपए की समस्या: उद्भव और समाधान

भीमराव अंबेडकर (बाबासाहेब) के अनमोल विचार (Dr. Bhimrao Ambedkar Quotes in Hindi)

“गलत को गलत कहने की क्षमता नहीं है तो आप की प्रतिमा व्यर्थ है।”

“जो धर्म जन्म से एक को श्रेष्ठ और दूसरे को नीचे बताएं वह धर्म नहीं, गुलाम बनाए रखने का षड्यंत्र है।”

“जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वह आपके किसी काम की नहीं”

“यदि मुझे लगा संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है तो इसे जलाने वाला सबसे पहले मैं रहूंगा।”

“अन्याय से लड़ते हुए आप की मौत हो जाती है तो आपकी आने वाली पीढ़ियां उसका बदला अवश्य लेगीं, किंतु अन्याय सहते-सहते यदि मर जाओगे तो आने वाली पीढ़ियां भी गुलाम बनी रहेंगी!”

“यदि आप मन से स्वतंत्र हैं तभी आप वास्तव में स्वतंत्र हैं!”

डॉ. भीमराव अंबेडकर की उपलब्धियां / पुरस्कार

  • भीमराव अंबेडकर जी का स्मारक दिल्ली में उनके घर 26 अलीपुर रोड में स्थापित किया गया है।
  • अंबेडकर जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है।
  • 1990 में मरणोपरांत होने भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।
  • भारत के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर रखा गया है।
  • उनका एक बड़ा अधिकारी का चित्र भारतीय संसद भवन में प्रदर्शित किया गया है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर की मृत्यु (Dr. Bhimrao Ambedkar Death)

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ आंबेडकर सन 1948 से मधुमेह बीमारी से पीड़ित चल रहे थे और वह इस दौरान कमजोर होते जा रहे थे इसी दौरान उन्होंने अंतिम पांडुलिपि भगवान बुद्ध और उनके धम्म को पूरा किया।

इसके कुछ दिनों बाद ही अपने संघर्षशील जीवन में निरंतर दलित उत्थान एवं समानता को बढ़ावा देने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर 6 दिसंबर 1956 को चिरनिंद्रा में विलीन हो गए।

वास्तव में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सिर्फ दलितों के लिए प्रेरणा स्रोत ना होकर समाज के हर संघर्षशील शोषित व्यक्ति के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उनका जीवन करोड़ों भारतीय नागरिकों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है, जो निरंतर उन्हें शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करता है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण रोचक तथ्य-

  • बाबा साहेब का जन्म मध्य भारत प्रांत की महू सैन्य छावनी में एक मराठी परिवार में हुआ था।
  • वह रामजी मालोजी और भीमाबई की 14वीं संतान थे।
  • वह बचपन से ही गौतम बुद्ध की शिक्षा से बहुत प्रभावित थे।
  • जब वह 15 वर्ष के थे तब उनका विवाह नव वर्ष की लड़की रमाबाई से हुआ था।
  • भीमराव अंबेडकर जॉन डेवी के लोकतंत्र निर्माण कार्य से बहुत प्रभावित थे।
  • वह अपना अध्ययन अस्थाई रूप से बीच में छोड़कर भारत वापस लौट आए थे।
  • मुंबई हाई कोर्ट में कानून की प्रैक्टिस करते हुए उन्होंने अस्पृश्यों शिक्षा को बढ़ावा दिया।
  • उन्हें देश के पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
  • उनके अनुयायियों द्वारा उन्हें आदर एवं सम्मान से बाबासाहेब कहा जाता है।
  • उन की 125 वीं जयंती संयुक्त राष्ट्र संघ में मनाई गई थी जहां संघ ने उन्हें ‘विश्व का प्रणेता’ कहा था।
  • उनके जीवन के ऊपर अब तक विभिन्न प्रकार की फिल्में व धारावाहिक बनाए जा चुके हैं।
  • एक छोटी जाति का होने के कारण उन्हें अपने जीवन में कठोर भेदभाव का सामना करना पड़ा है।

FAQ:

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म कब और कहां हुआ?

आधुनिक भारत के मसीहा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश में स्थित मऊ सैनिक छावनी में हुआ था।

डॉ भीमराव अंबेडकर की मृत्यु कब हुई?

डॉ भीमराव अंबेडकर की मृत्यु के बारे में कोई आधिकारिक तथ्य उपलब्ध नहीं है लेकिन जानकारी के आधार पर ऐसा माना जाता है कि उनकी मृत्यु 6 दिसंबर 1956 को खराब स्वास्थ्य के कारण हुई थी।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पास कितनी डिग्री थी?

डॉ भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में विभिन्न विषयों में शिक्षा को अर्जित करते हुए कुल 32 डिग्रियां हासिल की थी।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बेटे हैं?

यशवंत भीमराव अंबेडकर।

अंबेडकर के 3 गुरु कौन थे?

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के 3 गुरुओं में गौतम बुद्ध, कबीर और ज्योतिबा फुले शामिल है।

डॉक्टर अंबेडकर का मूल उपनाम क्या है?

कुछ सूत्रों के अनुसार बीआर अंबेडकर का मूल उपनाम रामजी सकपाल था।

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निष्‍कर्ष

मैं आशा करता हूं की आपको डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबासाहेब) का जीवन परिचय (Dr. Bhimrao Ambedkar Biography In Hindi) पसंद आया होगा। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया है तो कमेंट करके अपनी राय दे, और इसे अपने दोस्तो और सोशल मीडिया में भी शेयर करे।

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